राज्य उत्तराखंड के राजधानी देहरादून मे आज भी बच्चे हैं जो मजदूरी करते हैं दर बदर भटकते हैं और भीख मांगते हैं और अपना पेट भरते हैं । लेकिन कई लोग ऐसे हैं जो बच्चो को मजबूर करते हैं ये सब करने पर और कुछ लोग ऐसे भी हैं जो सब कुछ जानने के बाद भी बच्चों को रोकना या समझाना नहीं बल्कि उनसे ये कहते हैं की ये काम करो ये भी कर दो हैरान हूं मैं की मैने आज कुछ ऐसा देखा बीच सड़क पर जब ट्रैफिक जाम था और कुछ बच्चे भीख नहीं मांग रहे थे बल्कि गाडियां साफ कर रहे थे लोगों की और वो लोग उनको ये बोल रहे थे की यहां साफ कर दो वहां धूल हटाओ ये करो वो करो मतलब इंसानियत नाम की भी चीज़ नहीं जरा भी और तो और उन बच्चों ने जब पैसे मांगे तो बाद में उनको 1 या 2 रुपए देकर भगा दिया गया मुझे शर्म आती है ऐसे लोगों पर जो ऐसी हरकतें करते हैं काम भी करवाया और बच्चों को ऐसे काम से रोकना समझाना चाहिए था ना की उनका फायदा उठा कर उनको भागा दिया गया माना भीख नहीं मांगी साफ सफाई की पर उस मेहनत को भी नहीं दिया और ये वो लोग थे जो बड़ी कारो में बैठे थे बड़े घरों के रईसजादे थे । बच्चो का भविष्य कहीं ना कहीं आज भी अंधेरे में बंद हैं हम जितना कोशिश करते हैं उससे ज्यादा ये बच्चे अंधकार की ओर बढ़ रहे हैं और ये उन बच्चो की गलती नहीं है ये गलती है हमारी खुद की अगर हम उन बच्चो ऐसा कुछ करने से रोकें और ऐसी हजारों लाखों संस्था ऐसी हैं जो बच्चो के लिए काम करती हैं उनका भविष्य सवारती हैं बस जरूरत है तो अच्छा मन रखने की सोच अच्छी करने रखने की हमारा एक कदम आने वाले देश के भविष्य को बचा सकता है। ऐसे बच्चों की मदद ज़रूर करें उनसे काम ना कराया जाए अगर कहीं देखे भी तो उनसे बात कर उनको समझा और बताया जा सके ताकि वो भी वो दुनियां और भविष्य देखें जो हम पढ़ लिख कर देखना बनना चाहते हैं। बच्चों के भविष्य के लिए एक कदम आगे बढ़ाएं ।
