महान शोधकर्ता बने डॉक्टर कपिल कालरा,प्रधानाचार्य अल्पाइन कॉलेज

डॉक्टर कपिल कालरा ने बताया कि फार्मेसी के क्षेत्र में तपेदिक जैसी घातक बीमारियों का वी अब उपाय है और जिसकी दवा रिफाबूटिन पहले कम घुलनशीलता थी और अब 99% घुलनशीलता है ,

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देहरादून =देश में जितना महत्व डॉक्टर का होता है उतना ही महत्व वैज्ञानिक का भी होता है , खासकर कोरोना महामारी के वैक्सीन में वैज्ञानिकों ने अहम भूमिका निभाई है दुनियाभर में वैज्ञानिकों ने सहयोगियों द्वारा हासिल किया गया है और इस महान प्रगति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक द्वारा मान्यता दी जा रही है और नाम पर पेटेंट कराया गया है . अत्यधिक प्रशंसनीय पल है पूरे देश वासियों के लिए समाज के प्रति उनके कार्य सम्पूर्ण प्रेरणा है श्री अनिल सैनी , चेयरमैन अल्पाइन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट और श्रीमती भावना सैनी , प्रबंध निदेशक , अल्पाइन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स ने इस खोज पर अल्पाइन कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी के प्रधानाचार्य डॉक्टर कपिल कालरा, को बधाई देते हुए इसे दुनिया के लिए बहुत उपयोगी बताया ।
डॉ एस के चौहान निर्देशक अल्पाइन ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट ने कहा कि यह सफलता कई प्रयोगों और लंबी प्रक्रिया के बाद प्राप्त हुई है और चिकित्सा विज्ञान और पेटेंट की प्रगति में निपुण और मान्यता प्राप्त आवश्यक कार्य के लिए डॉ कपिल कालरा और उनकी टीम मै डॉक्टर ज्योति मैथानी कालरा,पूनम जोशी, डॉक्टर अरुण कुमार,काशिफ हुसैन एवं आलोक भट्ट को वी सम्मानित किया गया है। चिकित्सा के क्षेत्र में वैज्ञानिक हमारे निष्ठावान सहचर है । वैज्ञानिकों द्वारा मानव को विभिन्न असाध्य रोगों के इलाज की ओषदी प्राप्त हुई है । चेचक , हैजा तथा प्लेग आदि के विनाश से अब मानव अपने आपको सुरक्षित पाते हैं , आज संभवतरू कोई ऐसा रोग नहीं है , जिसका असाध्य कहा जा सके दो तीन को छोड़ कर , फार्मसी के क्षेत्र में एक शोध विद्वान डॉ कपिल कालरा प्रधानाचार्य अल्पाइन कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी द्वारा किए गए पेटेंट के लिए भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त और सम्मानित होना बेहद सराहनीय है ,
डॉक्टर कपिल कालरा ने बताया कि फार्मेसी के क्षेत्र में तपेदिक जैसी घातक बीमारियों का वी अब उपाय है और जिसकी दवा रिफाबूटिन पहले कम घुलनशीलता थी और अब 99% घुलनशीलता है , दो पेटेंट प्रकाशित किए थे तीसरा उन्होंने आज प्रकाशित किया ताकि रिफाबूटिन दवा की घुलनशीलता और जैवउपलब्धता को बढ़ाने के लिए तीन तरीकों का विकास किया जा सके,रिफैब्यूटिन दवा की घुलनशीलता बढ़ाने के लिए विधि विकसित की है,विधि सह शोधन क्षमता है, दो सॉल्वेंट मिला कर एक विधि विकसित किया जिस से रीफाबुटिं की घुलनशीलता वृद्धि किया जा सके,जो ट्यूबक्यूलोसिस टीबी के रोगियों को ठीक होने में महान चमत्कार लाने जा रहा है!

मनीष सकलानी मुख्य संपादक

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